ईसा से 3000 वर्ष पहले दजला और फरात नदियों के बीच बसी मेसोपोटामिया की सभ्यता में निवास करने वाले बेबीलोन के लोगों द्वारा बाएं हाथ के अंगूठे के साथ चारों उंगलियों के चार हिस्सों को गिना जिसका जोड़ था 12, जिस अंक को वहां के लोगों द्वारा एक पवित्र अंक माना गया हालांकि तब तक वह लोग नहीं जानते थे की पृथ्वी को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में 1 दिन का समय लगता है उन्हें बस रात के अंधेरे और दिन के उजाले का अंतर ही समझ आता था जैसे यह दो दुनिया है और उन्होंने यह 12-12 घंटों के अंतराल पर बांध दिया 1 घंटे में 60 मिनट कैसे हुए इसके लिए उन्होंने अपने बाएं हाथ का इस्तेमाल किया सभी चारों उंगलियों और इसके अंगूठे के 12 हिस्सों को भी गिना और इसका जोड़ साठ मिला हालांकि तब तक समय की सटीक जानकारी आम लोगों के लिए जरूरी नहीं थी ज्यादातर लोगों को घंटे के बात सैद्धांतिक लगती थी खगोल शास्त्रियों ने 60 की इस अंक को अपनी गणना के आधार पर इस्तेमाल किया। रात के आकाश के सटीक बंटवारे से वह तारों और ग्रहों की गति को दर्ज कर पाए और उसका अनुमान भी लगा पाए। पेंडुलम के अविष्कार ने 60 के अंक को समय की गणना में महत्वपूर्ण बनाया तब तक इंसान ने समय के छोटे-छोटे टुकड़ों की सटीक जानकारी देने वाला यंत्र बनाया जिसे घर बाद में घड़ी कहां गया। इससे रात और दिन की अलग-अलग गिनने का अंत हुआ और 24 घंटे का एक दिन अस्तित्व में आया यह व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है और आज भी जारी है। हालाकी इसके बाद समय की छोटी इकाई सेकंड और नैनो सेकंड का भी आविष्कार हुआ तथा परमाणु घड़ियों द्वारा समय के छोटी से छोटी इकाइयां पता की गई जिसका प्रयोग अंतरिक्ष अनुसंधान में भी किया जाता है और इसके द्वारा समय और चाल तथा दूरी में संबंध के ऊपर शोध भी किया गया है । महान वैज्ञानिक इस स्टीफन हॉकिंस द्वारा समय यात्रा की परिकल्पना की गई और यह अनुमान लगाया गया की भविष्य में इंसान द्वारा भविष्य में भी यात्रा की जा सकेगी।
एक दिन मे 24 घन्टे और 1 घन्टे मे 60 मिनट कहाँ से आया?
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