गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर सिवान जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर थावे नाम का एक छोटा सा स्थान है| जहां मां थावेवाली का एक प्राचीन मंदिर है| मां थावेवाली को थावे वाली महारानी और रहषु भवानी के नाम से भी भक्तजन पुकारते हैं| मां थावेवाली के बारे में एक बहुत ही प्रचलित कथा हैं, उसके अनुसार राजा मनन सिंह हथुआ के राजा थे| वे अपने आपको मां दुर्गा का सबसे बड़ा भक्त मानते थे| गर्व होने के कारण अपने सामने वे किसी को भी मां का भक्त नहीं मानते थे| इसी क्रम में राज्य में अकाल पड़ गया और लोग खाने को तरसने लगे| थावे में कामाख्या देवी मां का एक सच्चा भक्त रहषु रहता था| प्राचीन कथा के अनुसार मां की कृपा से दिन में वह घास काटता और रात को उसी से अन्न निकल जाता था| जिस कारण वहां के लोगों को अन्न मिलने लगा| लेकिन, इस चमत्कार का राजा को विश्वास नहीं हुआ| राजा ने रहषु को ढोंगी बताते हुए मां को बुलाने को कहा| रहषु ने कई बार राजा से प्रार्थना की कि अगर मां यहां आएंगी तो राज्य बर्बाद हो जाएगा और हम ने से कोई जीवित नहीं बचेगा| लेकिन, घमंडी राजा नहीं माने| रहषु भगत ने मां को पुकारा और मां अपने परम भक्त रहषु भगत के बुलावे पर असम के कामाख्या स्थान से चलकर यहां पहुंची थीं| कहा जाता है कि मां कामाख्या से चलकर कोलकाता (काली के रूप में दक्षिणेश्वर में प्रतिष्ठित), पटना (यहां मां पटन देवी के नाम से जानी गई), आमी (छपरा जिले में मां दुर्गा का एक प्रसिद्ध स्थान) होते हुए थावे पहुंची थीं| और रहषु के मस्तक को विभाजित करते हुए साक्षात दर्शन दीं| राजा के सभी भवन गिर गए और राजा तथा रहषु को मोक्ष मिल गया|
शक्तिपीठ थावे मंदिर गोपालगंज (बिहार)
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