चाँद के तापमान से जुड़ा पहला ऑब्जर्वेशन भेजा चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने।

चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर पर लगेचास्टेपेलोड नेचाँद के तापमान से जुड़ा पहला ऑब्जर्वेशन भेजा है।चंद्र सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट के अनुसारचंद्रमा की सतह परअलग-अलग गहराईऔरतापमान में बेहदअंतर है।चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर तापमान50 डिग्री सेल्सियस,80mm की गहराई में माइनस 10°C टेम्परेचर है। बता दे कीविक्रम लैंडर में लगे चास्टे में10 टेम्परेचर सेंसर लगाए गए है। जो100mm की गहराई तक पहुंच सकते है।स्पेस फिजिक्स लैबोरेटरी, VSSC ने अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के साथ मिलकर इसचास्टेपेलोड क

स्पेस सेक्टर में ज्यादा इंवेस्टमेंट के लिए 20 प्राइवेट फर्म्स बोली लगाएगी।

चंद्रयान-3 की सफलता के बादस्पेस वेंचर में तेजी सेइन्वेस्टमेंट को बढ़ावा मिल रहा है। पिछलेहफ्ते इसरो के सप्लायर्स और उनसे जुड़ी कंपनियों के शेयर्स की कीमतों तेजी से इजाफा होता दिख रहा था।रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसारस्मॉल सैटेलाइट लॉन्चिंग व्हीकल के प्राइवेटाइजेशन के लिए होने वाली नीलामी में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स,लार्सन एंड टुब्रो समेत20 कंपनियांबोली लगा सकती हैं। तो वहीइसरो केचीफ एस सोमनाथ ने कहा कीभारत के पास चंद्रमा, मंगल और शुक्र की यात्रा करने की क्षमता है, लेकिन भारत को काफीज्यादा इन्वेस्टमे

चंद्रयान की कामयाबी के बाद गगनयान को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी।

चंद्रयान-3 की सफलता के बाद इसरो गगनयान प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहा है। अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में इस मिशन के तहत एक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इसका मकसद यह तय करना है कि मानव मिशन के समय यह स्पेसक्राफ्ट उसी रूट से लौटे जिससे गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने 26 अगस्त को एक निजी चैनल के कॉन्क्लेव में यह बात कही।गगनयान प्रोजेक्ट के तहत स्पेस में व्योममित्र महिला रोबोट भेजी जाएगी। इससे पहले एक स्पेसक्राफ्ट भेजा जाएगा। व्योममित्र इंसानों जैसी सारी

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