7 अक्टूबर को हमास ने आकस्मिक रूप से इजराइल पर हमला किया। हमास के कई सदस्य गाजा से सटे इजराइली शहरों में घुसे और बेगुनाह इजराइली नागरिकों की हत्या कर दी। हमले के शिकार एक और शहर, 'निर ओ किबुत्ज,' में भी हुए, जिसमें कई लोगों की मौके पर मौत हो गई।
इस हमले में एक बुजुर्ग कपल भी था, जिनकी देखभाल के लिए केरल से आई दो नर्सें जिम्मेदार थीं। ये दो नर्स इस बुजुर्ग जोड़े को 'अम्मची (मां) और अप्पचन (पिता)' कहती हैं। इन दोनों नर्सों ने हमले के बाद अपनी बहादुरी और सूझबूझ के लिए अंगीकृति पाई है, जिसकी बारे में इजराइल और अरब मीडिया में चर्चा हो रही है। इन दोनों नर्सों की आयु 34 वर्ष है।
नर्सों ने बताया कि उनके घर में एक सेफ रूम था, जिसके दरवाजे लोहे के बने थे। उनके पास समय की कमी थी, इसलिए बुजुर्ग कपल को लेकर खुद भी वही चले गई। दरवाजे का हैंडल तब ही बंद किया गया और उसे मजबूती से पकड़े रहे। तब अचानक गोलियों की आवाज आने लगी। दूसरे कमरों से अरबी में आवाजें आ रही थीं और तोड़फोड़ की क्लैमर भी सुनाई दी। इसके दौरान, रूम का दरवाजा नॉक किया गया, और उन्हें अंग्रेजी में बताया गया कि उन्हें बचाने आए हैं, लेकिन वे तब समझ गए कि कुछ लोग दरवाजा खुलवाने के लिए अपने आप को इजराइली बता रहे हैं जिससे दोनो नर्स और सतर्क हो गई। सुबह 6 बजे से यह खौफनाक घटना दोपहर 1 बजे तक जारी रही जिसके बाद इजराइली सेना ने उनका रेस्क्यू किया।
दोनो नर्सों ने अपनी बहादुरी से बुजुर्गों व खुदकी जान बचाई। यह तस्वीर सऊदी अरब के ‘द नेशनल’ अखबार से ली गई है। बाईं तरफ सबिता और उनके साथ मीरा हैं। दोनों को लोकल मीडिया सुपरवुमन बता रहा है।
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