चाचा को देख बॉक्सिंग में लेने लगी दिलचस्पी, शुरू की कोचिंग, आज दुनियाभर में नाम।

हर इंसान की जिंदगी में कभी ना कभी रुकावटें आती हैं, जो इंसान इन रुकावटों को पार करके आगे बढ़ता है, वहीं इंसान अपने मुकाम को हासिल कर पाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है निकहत जरीन की, जिन्होंने बॉक्सिंग में कुछ समय पहले ही थाईलैंड की बॉक्सर को हराकर अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। 14 जून सन् 1996 में जन्मी निकहत जरीन के चाचा समसुद्दीन ने इन्हें बॉक्सिंग की दुनिया से रूबरू कराया, इनके चाचा बॉक्सिंग के कोच थे। अपने चाचा को कोच करते देख जरीन की भी बॉक्सिंग में रूचि बढ़ने लगी, और वो अपने चाचा …

एक्टिंग से अच्छा लगाव, शुरू किया बनाना शॉर्ट वीडियो, आज इंस्टाग्राम पर 3 करोड़ फॉलोवर्स।

अपनी हेयर स्टाइल से लाखों लोगों को दीवाना करने वाले 3 अक्टूबर 2003 में भूटान के जैगुन मे एक मुस्लिम परिवार में जन्में टिक टॉक स्टार रियाज अली आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। भूटान के जैगुन के प्रसिद्ध स्कूल श्री हनुमान मंदिर धर्मशाला से अपने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले रियाज अली को बचपन से ही एक्टिंग से बड़ा लगाव था। उन्हें एक्टिंग करना बहुत अच्छा लगता था। एक एक्टर बनने के सपने को दिल में लेकर रियाज ने टिक टॉक के माध्यम से अपने करियर की शुरुआत की। वहाँ पर उन्हें काफी अच्छी फैन फॉलोइंग मि

छोड़ा आईएस का पद, शुरू किया कोचिंग सेंटर, आज टॉप 5 कोचिंग सेंटर में से एक।

आज के समय में पढ़ा-लिखा होना बेहद जरूरी हो गया है, अगर आप एक स्टूडेंट हैं और आप यूपीएससी क्लियर करने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपने दृष्टि द विज़न कोचिंग सेंटर का नाम जरूर सुना होगा। इस सेंटर को शुरू किया था हरियाणा में एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे विकास दिव्यकीर्ति ने। विकास दिव्यकीर्ति पढ़ने लिखने में बचपन से ही काफी अच्छे थे। इन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए, एमए, एम.फिल और पीएचडी की डिग्रीयाँ हासिल की। इसके बाद इन्होंने सन 1996 में पहली बार यूपीएससी का पेपर दिया और अपने पहले प्रयास में

मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी सुमन ने छोटे स्तर से की शुरुआत, आज घर बैठे कमा रहीं हैं लाखों।

हर इंसान अपनी जिंदगी में कोई ऐसा सपना देखता है जिनमें वह पूरा करने के लिए जी-जान लगा देता है, लेकिन उन्हें को पूरा करना आसान नहीं होता। उन्हें पूरा करने के लिए धैर्य और कड़ी मेहनत लगती है। ऐसा ही सपना एक हरियाणा के हिसार में एक मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी सुमन ने देखा था। सुमन ने जैसे-तैसे करके अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उसके बाद पढ़ाई जारी रखने और परिवार का हाथ बंटाने के लिए नौकरी करना जरूरी हो गया। सुमन शादी से पहले और शादी के 6 साल बाद तक नौकरी करती रहीं। …

90 करोड़ की अगुवाई करने में कामयाब हुआ स्टार्टअप, केएल राहुल को बनाया पहला ब्रांड एम्बेसडर।

यूएस से एमबीए करने के बाद योगेश काबरा ने अपने जैसे युवा पुरुषों के लिए इनरवियर खरीदने और पहनने को एक रिटेल और मजेदार अनुभव बनाने के उद्देश्य से 2016 में XYXX की शुरुआत की। दूसरों से कुछ अलग करने की चाह में योगेश ने कुछ अलग पेश करना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने कपड़ों के बारे में अध्ययन करने में 6 महीने बिताए। शुरू होते ही कुछ ही महीनों में बिजनेस ने उड़ान भरना शुरू कर दिया। स्टार्टअप का शुरू से ही लक्ष्य प्रमुख महानगरों के साथ-साथ टियर 1, 2 और 3 बाजारों में उनकी सफलता के लिए महत्वपूर्ण रहा …

2019 में हुई स्टार्टअप की शुरुआत, आज 100 मिलियन डॉलर नए प्लेटफार्म का किया अधिग्रहण।

रवि भूषण द्वारा शुरू किया एडटेक प्लेटफॉर्म ब्राइटचैम्प्स BrightCHAMPS 6 से 16 साल की उम्र के बच्चों को कोडिंग, फाइनेंशियल लिटरेसी और रोबोटिक्स में हर महीने 3 लाख क्लासेज मुहैया कराता है। इस साल की शुरुआत में ब्राइटचैम्प्स क्रिप्टोकरेंसी पेमेंट्स को स्वीकार करने वाली पहली एडटेक स्टार्टअप बन गया था। जून 2022 में ब्राइटचैम्प्स ने घोषणा की थी कि उसकी योजना 100 मिलियन डॉलर का अधिग्रहण करके फाइनेंशियल ईयर 2023 में ब्रिटेन, अमेरिका, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी एशिया और भारत में एडटेक अधिग्रहण

2021 में शुरू हुआ स्टार्टअप, 12 महीनों के अंदर पेड सब्सक्राइबर बेस में 45 गुना की वृद्धि।

भारत के सबसे तेजी से बढ़ते फुल-स्टैक हेल्थ और वेलनेस क्लिनिक में से एक स्टार्टअप Mojocare को अश्विन स्वामीनाथन और रजत गुप्ता ने साथ मिलकर साल 2021 में शुरू किया था। यह स्टार्टअप सेक्सुअल वेलनेस, मानसिक कल्याण, महिलाओं के कल्याण और बालों के झड़ने के बारे में निजीकृत और फुल-स्टैक केयर मुहैया कराने में सक्षम है। निजीकृत केयर डिलीवरी सिस्टम यूजर्स को विशेष कल्याण में पुरानी और जीवन शैली की बीमारियों को ठीक करने में सहायता करता है। मोजोकेयर के को-फाउंडर अश्विन स्वामीनाथन ने ऐलान किया है कि स्टार्टअप

कोरोना में शुरू किया स्टार्टअप, बच्चों को सिखा रहा है वीडियो कंटेंट बनाने की A,B,C,D

स्टार्टअप xQ की शुरुआत कोविड-19 के दौरान हुई थी, जिसे कार्तिक तलवार, साइमन जैकब, पवन वदलमणि और दक्ष शर्मा ने मिलकर शुरू किया था। 2020 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप स्कूल के साथ काम करके वहां वीडियो लैब सेटअप करता है, और स्कूल को उपकरण प्रदान कराता है। इन उपकरण के माध्यम से स्कूल के बच्चों को वीडियो कंटेंट पढ़ाया जाता है, और हर सेशन का कंटेंट और पाठ्यक्रम प्रोवाइड कराया जाता है। स्टार्टअप के सीईओ कार्तिक तलवार बताते हैं कि स्किल्स का स्कूल से जुड़ाव बनाए रखने के लिए हम हर प्रोजेक्ट के बाद जो असाइनमें

बिना पैसा लगाए शुरू किया बिजनेस, आज बड़े-बड़े सेलिब्रिटी हैं उनके कस्‍टमर।

12 अक्टूबर सन् 1990 को मथुरा में जन्मी मालविका सक्सेना को बचपन से ही आर्ट में रुचि रही। लेकिन उनके घरवालों का मानना था कि इंटेलीजेंट बच्चे साइंस और कॉमर्स पढ़ते हैं, ये आर्ट-वार्ट तो पढ़ाई में फिसड्डी लोगों की चीज है। मालविका ने मथुरा से एमबीए किया। मालविका बताती हैं कि मुझे जितनी बंदिशों और नियंत्रण में पाला गया था, मेरे अंदर आजाद होने की इच्छा भी उतनी ही तेज हो गई थी। एक दिन में अपने कमरे में पुराने जूते पड़े मिले जिन्हें वो बैठने वाली थी, लेकिन इन्होंने जूतों को बैठने की बजाय पेंट कर डाला। यह

1.5 लाख में शुरू किया था चिकनकारी का बिजनेस, आज 1.5 करोड़ रुपये है टर्नओवर।

उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों का शहर लखनऊ की एक चीज इस शहर को दुनिया में लोकप्रिय बनाने में योगदान रखती है, और वह है चिकनकारी। यह कपड़ों पर की जाने वाली कढ़ाई का एक फॉर्म है। इसी चिकनकारी के बिजनेस से लखनऊ में न जाने कितने लोग जुड़े हुए हैं, उन्हीं में से एक हैं कृष्णा चिकन एंपोरियम के मालिक कृष्णा पाल का। उत्तर प्रदेश के जिले उन्नाव के सफीपुर से ताल्लुक रखने वाले 25 साल के कृष्णा पाल चिकनकारी वाले कपड़ों के होलसेल बिजनेस में हैं, इनकी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर बिक्री तक का काम वह अपने पिता …

2006 में टाटा संस बोर्ड में शामिल होने से, चेयरमैन बनने तक, ऐसा रहा साइरस मिस्त्री का सफर।

4 जुलाई सन 1968 को जन्मे साइरस मिस्त्री पालोनजी शापूरजी मिस्त्री के सबसे छोटे बेटे थे। इन्होंने मुंबई के कैथेड्रल एंड संस जॉन कॉनन स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। साल 1990 में लंदन के इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर 1991 में परिवार की कंस्ट्रक्शन कंपनी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी लिमिटेड के डायरेक्टर के रूप में ज्वाइन किया। इसके बाद साइरस 2006 को टाटा संस बोर्ड में शामिल हुए। पिता पालोनजी मिस्त्री के टाटा संस से रिटायर होने के बाद उनकी एंट्री हुई थी। साइरस मिस्त्री में टाटा समूह क

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