स्वास्थ्य और सेहत की सोच से सफल बिजनस तक का रास्ता।


The way from the thinking of health service to successful business.

बरेली के रहने वाले रामवीर सिंह ने फसलों में इस्तमाल किए जानें वाले कीटनाशक के कारण हुए कैंसर को देख कर आधुनिक हाइड्रोपोनिक खेती की शुरुवात की। इसके लिए उन्होंने अपनी फुल टाइम पत्रकारिता वाली नौकरी छोड़ कर अपने गाँव बरेली आ गए। वहा उन्होंने अपने तीन मंजिला घर के बालकनियों और खुली जगहों में हाइड्रोपोनिक खेती के लिए पीवीसी पाइप्स को लगाया। फिर उसमें आवश्यक दूरी पर जालीदार छोटे गमले लगाए। उन्हीं गमलों में 10 हजार से अधिक सब्जियों के पौधों को लगाया गया। पोधों में पानी देने के लिए पाइप में से वाटर पंप से पानी छोड़ा जाता था। उनके घर में हाइड्रोपोनिक प्लांट 750 वर्गमीटर में हैं। जहां सभी मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं। रामवीर सिंह उन सब्जियां को घर में इस्तमाल करने के साथ साथ मार्केट में भी बेचकर लाखो रूपये हर महीने कमाते हैं। हाइड्रोपोनिक खेती की सब्जियों में अधिक पोषक तत्त्व होते है। इसमें किसी भी प्रदूषण या हानिकारक रासायनिक कीटनाशक का कोई खतरा नहीं होता। रामवीर सिंह ने दुबई में हाईड्रोपोनिक खेती को देख कर बेहद प्रभावित हुए। इसलिए दुबई से लौटने के बाद कोलकाता, मुबई और इंटरनेट से उन्होंने हाईड्रोपोनिक खेती की जानकारी ली। इस तरह हाइड्रोपोनिक खेती ने उनकी जिंदगी बदल दी। आज उनका हरियाली से भरा तीन मंजिला घर राहगीरों को काफी आकर्षित करता है। उनकी एक विम्पा ऑर्गेनिक और हाईड्रोपोनिक्स कंपनी भी है जो दूसरे लोगों को हाइड्रोपोनिक खेती करने में मदद करता है। और 70 लाख रुपए इस कंपनी का सालाना रेवेन्यू है।

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