संघर्ष: महिलाओं की प्रेरणा बनती एम॰बसंत कुमारी


Conflict: MB Basant Kumari becomes inspiration for women

मानव जीवन हमेशा ही अपरिपुर्ण रहा है, लेकिन ये जरूर परिपूर्णता को हमेशा चुनौती देने की कोशिश किया है। आज का परिवेश इसी सोच के इर्द-गिर्द ही घूम रहा। क्षणिक सुख और सम्मान के नाम पर मनुष्य इस प्राकृतिक वातावरण को भी समाप्त कर चुका है, इतिहासबोध यही है। हम बात कर रहे एशिया की पहली महिला ड्राइवर की जो जीवन के संघर्ष को दिनचर्या की भाँति जी, लेकिन अपने इस जीवन पर अफसोस जाहिर नहीं की। 63 वर्षीय एम॰ बसंत कुमारी से बचपन ही में उनके सर से माँ का साया उठ गया, जहां ये आभास हुआ कि कर्म पथ ही जीवन पथ है। 19 साल की अवस्था में ही उनकी शादी ऐसे शख्स से कर दी गयी जो खुद चार बच्चों का बाप था, लेकिन दुर्दिन यहां भी साथ नहीं छोड़ा। उनके ऊपर चार बच्चों की जिम्मेदारी छोड़ पति भी गुजर गए। जो भी वसीयत कमाने के लिए छोड़ गए उससे परिवार का पेट भर पाना सम्भव नही हो पाता था। एक महिला होने के नाते ये चुनौती बहुत बड़ी थी, लेकिन चुनौती से लड़ने की कला जरूर पैदा कर चुकी थी। सब जाननेवालो ने महिला ड्राइवर आरक्षण को देखकर ड्राइवर बनने का विचार दिया। कई दफा परीक्षा में फेल होने के बाद आखिरकार पास हुई। आज एशियाई की पहली महिला ड्राइवर के तौर पर जानी जाती हैं। 

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